"शिकंजा प्रेम का"
"दिल में प्रेम का समंदर भर आए,
उनको देखूं तो खुद को आँखें भूल जाएं
हुस्न की बस्ती में जान फंस जाए,
उनकी हँसी हमें और तड़पाए
लूटा था मैंने अपना,
साया उनके लिए ,
कैसी चाह बना दी रबा,
सपने खोजता हूं उनके लिए
बैठा था दिमाग में,
प्रेम से तर्क ना कर पाए,
जब भी आँखों को देखूं ,
उनका ही चेहरा लेकर आए।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







