चल
अचल
डिग
अडिग
सिक्का
लोटा दे
आईस्क्रीम
खानी है|
आज
नहीं तो
कल
डण्डे या
डांट से
रूपये
लेकर ही
जाऊंगी|
ना तेरी
ना मेरी
मम्मी
कुछ कर पायेगी,
जब मैं
गुस्से से
पेश
आऊंगी|
-सिद्धार्थ शर्मा

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
चल
अचल
डिग
अडिग
सिक्का
लोटा दे
आईस्क्रीम
खानी है|
आज
नहीं तो
कल
डण्डे या
डांट से
रूपये
लेकर ही
जाऊंगी|
ना तेरी
ना मेरी
मम्मी
कुछ कर पायेगी,
जब मैं
गुस्से से
पेश
आऊंगी|
-सिद्धार्थ शर्मा
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