सियाराम बिन क्या भक्ति हो,
सियाराम बिन क्या भक्ति हो,
एक नज़र से पास आते हो,
एक नज़र से दूर जाते हो,
एक पल में दिल में रहते हो,
एक पल के दिल में घूम रहते हो,
एक पल में साँस आती है,
एक पल में साँस जाती,
बीच में क्या भरोसा है,
तुम ओझल हो जाओ तो,
सारा सुकून निष्फल रहता है,
भक्ति में हनुमान साहिल हो गए,
सागर के तुम मालिक हो,
काल की नैया पर सब बैठे हैं,
बस तुम्हारी दिशा आदेश दे,
आत्म की हवाएं चला दो,
हम बिखरों को तुम संभालों,
हम एकजुट में ही इतनी कमी है,
तुम्हारी एकता में सारी ज़मीं है,
तुम ही कमी जीवंत करोगे,
उस कमी की कमी को दूर करोगे,
कमी इस पीड़ा दूर हटा,
सारा जीवन पास ला दो,
सियाराम बिन क्या भक्ति हो,
सियाराम बिन क्या भक्ति हो।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







