समंदर
ऊपर से जितना शांत दिखता है,
भीतर उतना ही
टूटे हुए आकाशों का घर होता है।
उसकी लहरें
सिर्फ पानी नहीं लातीं,
वह किनारों तक पहुँचाती हैं
अनगिनत अधूरी प्रार्थनाएँ,
डूबे हुए सपनों की नमक भरी गंध,
और उन लोगों की चुप्पियाँ
जो रोते तो रहे,
पर आवाज़ कभी बाहर नहीं आई।
समंदर जानता है
कैसे छिपाई जाती हैं पीड़ाएँ।
वह हर शाम
सूरज को डूबते देखता है,
फिर भी अगली सुबह
उसी विश्वास से चमक उठता है।
उसकी गहराइयों में
मोती कम,
अकेलापन ज्यादा मिलता है।
वहाँ अँधेरा भी है,
और एक ऐसी नमी
जो आत्मा तक उतर जाती है।
कभी-कभी लगता है,
समंदर दरअसल
हर उस इंसान का दूसरा रूप है,
जो बाहर से मुस्कुराता है
और भीतर
धीरे-धीरे बिखर रहा होता है।
पर सच यह भी है—
हर तूफ़ान के बाद
समंदर फिर शांत हो जाता है।
वह अपनी लहरों को
फिर से प्यार करना सिखा देता है।
शायद इसी लिए
उसकी विशालता डराती नहीं,
सांत्वना देती है।
जैसे कोई कह रहा हो—
“टूटना अंत नहीं होता,
गहराई में भी
जीवन धड़कता रहता है।”


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







