जग की माता, भाग्य विधाता,
वीणापाणी शारदे,
तेरा वंदन, करूँ अभिनन्दन,
आरती उतार के!
अधम हूँ मैं, बालक अज्ञानी,
ज्ञान की देवी, तू कल्याणी,
अपनी गोद में लेकर मुझको
स्नेहिल माँ का प्यार दे!
जग की माता,…………
मन निर्मल हो, सोच धवल हो,
जीवन पथ मेरा उज्ज्वल हो,
बन याचक बस इतना माँगू
मुझको मत संसार दे!
जग की माता,…………
नवल गान, नवगीत हो अनुपम,
छन्द रचें नित नूतन सरगम,
आन बसो माँ कंठ में मेरी
तूलिका को नव धार दे!
जग की माता,…………
दुनिया माया, लोभ की गागर,
पाप की गठरी, तम का सागर,
ऐसे भव सागर से माता,
तू मुझको भी तार दे!
जग की माता,…………
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©️✍🏻प्रमोद कुमार,
गढ़वा (झारखण्ड)
पिन-८२२११४


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