कविता :शब्द निः शब्द
दिनांक 24/04/2026
दर्दनाक शर्मनाक घटना होती शब्द निः शब्द होता जाते है। मुख पर ताला लग जाता है गहरी पीड़ा होती है।
भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण जब होता है।
अखियों से जलधारा बहती है चारों ओर सन्नाटा होता है।
जब मासूमों की जान गई मां बाप सब दर्द सारा सहते है।
शब्द निःशब्द हो जाते है वर्णन नहीं कर पाते है।
इस दर्द को जब सब सहते है बेचैनी सी बहुत होती है।
दिल फूट फूट कर रोता है ज़ख्म गहरा होता है।
शब्दों की ताकत जब क्षीण हो जाती है।
जब दर्दनाक शर्मनाक घटनाएं होती है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞💞💞✒️💞💞💞💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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