जो आज पैदा हुआ,
जिसके जीवन को सही नींव की ज़रूरत है,
और दूसरा,
जो अपने अंत से
नए आग़ाज़ की ओर है।
दोनों का जीवन
अनिष्ट की ओर है,
दोनों आज ऐसे पिंजरे में क़ैद है,
जहाँ दोनों ही
अपनों के बीच रहते हुए भी
अकेले हैं।
एक को मिली सही दिशा
उसका सशक्त भविष्य बना सकती है,
और एक के जीवन के अनुभव से
कोई गिरता हुआ भी
उठ सकता हैं।
आज की यह ऐसी कड़वी-सी हक़ीक़त है,
जहाँ सब कुछ जानते हुए भी
हर कोई
आँखों पर पट्टी बाँधकर
अपनी ही धुन में
डूबा हुआ हैं।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







