क्या क्या ख्वाब रहे मन भी पुलकित रहा।
प्यास बुझाने को दिलोदिमाग अर्पित रहा।।
सौभाग्य से वो वक्त आया हलचलें तेज रही।
संस्कारों की अग्नि में सब कुछ समर्पित रहा।।
तन मन में हिलोरे कुछ इस कदर उठने लगी।
भावनाओं का बहाव मर्यादा में समर्पित रहा।।
कामना छिपाना मुश्किल ही नही नामुमकिन।
आदर्शों की आड़ में सब कुछ समर्पित रहा।।
वक्त की करवट से भयभीत था मन 'उपदेश'।
विरह की चोट सह गई सम्मान समर्पित रहा।।
मिलन की आस लिए छटपटाते कह न पाते।
देह अब भी जीवित व्यथित मन समर्पित रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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