रुक ना जाये
जिदंगी ,बस मै चलती रहूं
राहे भले हो काँटो की
बस मै उन पर भी चलती रहुं
डरु ना मै किसी कठिनाई
हमेशा इस बात पर मै डटी रहुं
धुप रहे अगर
कभी थकी न रहुं
अपनी राहो मे
कभी ना रूकी रहुं
धुप लेकर छांव किसी की
मै बनती रहुं
छांव मिले अगर
उसकी आदि न बनकर रहुं
बनु मै किसी का सहारा
मै कभी रुकी ना रहुं
रुक ना जाये
जिदंगी, बस मै चलती रहुं
जे .व्ही. जयश्री .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







