""गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई ,
वही हाल है मेरा जो,
फूलों का होता है,
एक क्षण की खुशबू का,
दीवाना सारा जग होता है,
उसमें भी मुरझा के,
टूटा बिखरा होता है,
भंवरा आकर उसका,
रस पी के जब जाता है,
उसी रस से अमृत जैसा शहद जब बनता है,
फूलों का छोटा जीवन उसी पल से शुरू होता है,
ऐसे ही मेरा जीवन तेरे बिना नीरस रहता है,
अब तो आकर ले जा रामा तुझमें रम जाना है,
अब इस पुकार को सुन ले रामा,
जिह्वा भी बड़ी चंचल हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई।
बाल उम्र से जो भी देखा,
वो सब रहता अधूरा है,
जिसको भी पाने जाता खोकर चूर हो जाता है,
मुझे भी अस्तित्व मेरा आगे बहुत तड़पाता है,
अब तो आकर ले जा रामा,
सारी गतिविधियां हो गई,
रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
गहराई से सोचा तो दुनिया करवटें हो गई,
गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रामा,
रटते रटते,
रटते रटते,
आधी उमरियां,
आधी उमरियां हो गई,
रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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