Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई।

""गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई ,

वही हाल है मेरा जो,
फूलों का होता है,
एक क्षण की खुशबू का,
दीवाना सारा जग होता है,

उसमें भी मुरझा के,
टूटा बिखरा होता है,
भंवरा आकर उसका,
रस पी के जब जाता है,
उसी रस से अमृत जैसा शहद जब बनता है,
फूलों का छोटा जीवन उसी पल से शुरू होता है,

ऐसे ही मेरा जीवन तेरे बिना नीरस रहता है,
अब तो आकर ले जा रामा तुझमें रम जाना है,

अब इस पुकार को सुन ले रामा,
जिह्वा भी बड़ी चंचल हो गई,

रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई।

बाल उम्र से जो भी देखा,
वो सब रहता अधूरा है,

जिसको भी पाने जाता खोकर चूर हो जाता है,
मुझे भी अस्तित्व मेरा आगे बहुत तड़पाता है,

अब तो आकर ले जा रामा,
सारी गतिविधियां हो गई,

रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,

गहराई से सोचा तो दुनिया करवटें हो गई,
गहराई से देखूँ तो साँसें अटपटी हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई,
रामा रामा,
रटते रटते,
रटते रटते,
आधी उमरियां,
आधी उमरियां हो गई,
रामा रामा रटते रटते आधी उमरियां हो गई।।""


- ललित दाधीच




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

कृष्णा शर्मा said


बबहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏👏
रामजी सुनते भी तों. नहीं...
सादर प्रणाम 😊🙏

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