कविता:प्रतिभा
दिनांक:21/05/2026
अपनी प्रतिभा दिखाकर सबको प्रतिभाशाली बनाना है।
कर्म लेखनी वाणी आचार विचार से प्रतिभा दिखाना है।
इस जग के हर बालक को सद्गुण सिखाना है।
भारत के बच्चे बच्चे को शिक्षण से प्रतिभाशाली बनाना है।
मात पिता के कुल के दीपक तुमको राह दिखाना है।
संत शिरोमणि वीर योद्धा के सद्गुणों को अपनाना है।
परिवर्तन हो रहा जग में अपना वजूद बचाना है।
नष्ट हो रही संस्कृति मानवता को प्रतिभा से बचाना है।
आग्रह विचार दर्शन से दुनिया को प्रमाण यही देना है।
सबको प्रतिभाशाली बनकर देश का गौरव बढ़ाना है।
मर्यादा का खनन हो रहा अद्भुत साहस दिखाना है।
आत्मविश्वास जागृत करके चरित्र संस्कृति को बचाना है।
तुम भारत के गौरव हो अपनी पहचान बनाना है।
सभ्यता हमारी खतरे में उसे प्रतिभा से बचाना है।
अन्याय अराजकता अपराध से भारत को बचना है।
सहज सजक पावन दृष्टि से अपनी प्रतिभा दिखाना है।
अन्याय विरुद्ध प्रखर बुद्धि से भारत देश को बचाना है।
अपनी प्रतिभा दिखाकर सबको प्रतिभाशाली बनाना है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞💞✒️💞💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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