Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

पता ना चला

पता ना चला
कब तू मिला,
मिलके क्यों?
अपना सा लगा।
यूं आना करीब
मेरा तुझे,
जान मेरी क्यों?
दिलकश लगा।

सोचा ना था
मुकम्मल होगा,
प्यार तुझसे
इतना होगा।
खास बना
एहसास बना,
तू मेरा इकलौता
राज़ बना।
पता ना चला.....

पता ना चला
कब तू मिला।
मिलके क्यों
अपना सा लगा।

जो तू मिला
डर भी लगा,
फिर भी जाने क्यों?
सुकूॅं तो मिला।
कोई ख़्वाब
दिल में पलने लगा,
जब तूने ख़ुद को
मेरा कहा।

गीत बना
संगीत बना,
तू मेरे मन का
दीप बना।
हमदर्द बना
हमराही बना,
तू ही मेरी
कहानी बना।
पता ना चला...

पता ना चला
कब तू मिला,
मिलके क्यों?
अपना सा लगा।

💐 रीना कुमारी प्रजापत 💐







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सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (8)

+

शिवचरण दास said

बहुत खूब रीना जी

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏🙏

उपदेश कुमार शाक्यावार said

भाव विभोर करती रचना...आपको सादर प्रणाम और सुप्रभात

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

प्रणाम 🙏 शुक्रिया

सुभाष कुमार यादव said

बहुत सुंदर रचना। हृदय के भावों की उत्तम अभिव्यक्ति।👌👌🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏🙏🙏🙏

अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' said

Waah bahut behtreen rachna, aadarneey mam ko saadar pranam 🙏🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏🙏🙏🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

प्रीत की डोर अजब-गजब है, कौन कब कहां किससे कैसे बंध जाए,पता ही नहीं चलता। वाह, हृदय सिंधु से भावों की उठती हुई वो लहरें जो सीधे गहराई तक उतरते जाती है।👌🌹🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

बहुत बहुत शुक्रिया आपका🙏🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! बेहद ख़ूबसूरत जज़्बात से लबरेज़ एक दिलकश कविता! ग़ज़ब 👌👍🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏🙏

वन्दना सूद said

पता ना चला
कब तू मिला,
मिलके क्यों?
अपना सा लगा।👌👌👏👏बहुत खूबसूरत लाजवाब रचना

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

धन्यवाद आपका🙏

ललित दाधीच said

खूब बहुत खूब 🙏🙏❤️💎🎉🎉

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏🙏

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