आज़ाद तो हमारे माता पिता ही नहीं थे और आज़ादी हमें भी पसंद नहीं है
दुनियां में हम भेजे गए खुदा के हुक्म पर चलने केलिए पैगाम
मुहम्मद ने दिया
आज़ाद मोहन दास करम चंद गांधी थे जो कि उनका मिशन नहीं था मेरे दोस्तों
खुदा से बगावत रखने वाला कौम है यहूदी इन्सान की कतल करना मक़सद है
हम तन्हा हैं समाज में माता पिता और भाई बहन सब रुखसत हो गए जहान से
कुछ भी कर लें हम कोई रोकने वाला नहीं मनमानी राह चलने वाला ज़मीर नहीं है
एक कौम के खातिर खुदा को ज़लाल आ गया है वह कह नहीं सकते हम बता रहे हैं
आज़ाद यहूदी का जम्हूरी निज़ाम निस्त नाबूद होने के दर पर है पैगाम दे रहा है वसी
खुदा ख़ुद से कुछ नहीं करते रु बरु इन्सान के सामने चिड़िया भी खाती है दाना चुन कर
इन्सान के मोहताजी में है पशु पक्षी इन्हे कौन पूछे खुद का पेट हराम राह से भरता है
वसी अहमद क़ादरी। वसी अहमद अंसारी
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







