ये जो तुम बिन कहे चले गए।
कौन कहता कि तुम भले गए।।
सूखे पत्ते की तरह सूखी रही।
बेमियाद ही बिना गले मिले गए।।
मीलों दूर से पढ़ लेते थे प्यास।
पहलू में जिस्म रहा नजारे गए।।
जी भर बरसी बारिश के बाद।
अस्मित के भी गिले शिकवे गए।।
रूह का रिश्ता आज भी कायम।
प्रिय 'उपदेश' बिना माथा चूमे गए।।
खसारा देखूँ किससे मिन्नतें करूँ।
सूखी रेत की तरह चमकते गए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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