जब कभी मन जले और धुँआ न दिखे।
अफ़वाह मानना नही इश्क है ये न दिखे।।
बहुत परिंदे होते पुराने मिजाज़ के जैसे।
जब वो चहचहाने लगें फिर शाम न दिखे।।
मोहब्बत में सादगी से चलना किसे पसंद।
जिसकी सीधी चाल उसको सामने न दिखे।।
जो दिल में जुबान पर नही आता 'उपदेश'।
उनके जेहन में सवाल का जबाव न दिखे।।
हमें बीते हुए लम्हों का कोई मलाल नही।
अजीज करीब आकर भी मुझको न दिखे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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