मोहब्बत की दुकान
भाग - 3
हरिया – दरिया भाई मोहब्बत की दुकान में आपके साथ-साथ सभी पाठकों और लेखकों का स्वागत है।
दरिया – हरिया भाई उनके साथ-साथ आपका भी स्वागत है।
हरिया – दरिया भाई आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
दरिया – ठीक है मगर आपने आज किस कलाकार को यहां निमंत्रित किया है?
हरिया – दरिया भाई हमने आज वन्दना जी को निमंत्रित किया है और उन्होंने हमें यह यकीन भी दिलाया है कि भले ही वो कहीं भी हों मोहब्बत की दुकान में अवश्य तशरीफ लाएंगी।
दरिया – हरिया भाई यकीनन आज तो हम अध्यात्म और वर्तमान के संग-संग प्रेरणा दायक ज्ञान से मालामाल हो जाएंगे।
हरिया – दरिया भाई अवश्य ही आज मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान की अद्भुत गंगा बहने वाली है।
दरिया – हरिया भाई और क्या नया होने वाला है?
हरिया – दरिया भाई आज वो हमारे लिए और हमारे भुककङ प्रवृति वाले कुछ लेखकों के लिए स्पेशल रेसिपी भी लेकर आ रही हैं?
दरिया – हरिया भाई फिर तो बहुत मजा आएगा? वे शख्स कौन हैं जो मोहब्बत की दुकान में खाने पीने की मंशा रखते हैं?
हरिया – दरिया भाई, सबसे ज्यादा भुककङ तो सुप्रिया साहू है, मगर मनोज सोनवानी और रीना प्रजापत भी पीछे नहीं हैं, श्रेयसी और कमलकांत घिरी तो कब से मुंह फैला कर बैठे हैं और कम तो दूसरे भी नहीं हैं।
दरिया - ऐसा क्यों?
हरिया - ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर लेखक और कवि फककङ और भुककङ होते हैं और घर में तो उन्हें कोई पूछता नहीं इसलिए कवि सम्मेलन या साहित्य गोष्ठियों में ही अपने शौक पूरे करते हैं।
दरिया – हरिया भाई रेसिपी का नाम सुनते ही मेरे मुंह में भी पानी आ रहा है, क्या आप बता सकते हो कौन सी रेसिपी लेकर आ रही हैं?
हरिया – दरिया भाई ये तो मुझे भी मालूम नहीं है, आप उन्हीं से पूछ लेना वो क्या लेकर आई हैं? बस वो पहुंचने वाली ही हैं।
दरिया – अरे वाह हरिया भाई आपने कहा और वो तशरीफ ले भी आई हैं।
( दोनों उठ कर वन्दना जी का स्वागत करते हैं)
दोनों एक साथ – आईए-आईए नमस्कार वन्दना जी, मोहब्बत की दुकान में हमारी तरफ से और हमारे सभी पाठकों और लेखकों की और से आपका स्वागत है।
वन्दना जी – नमस्कार हरिया और दरिया भाई। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने मुझे अपने इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया।
दरिया – जी तशरीफ लाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
हरिया – वन्दना जी तशरीफ रखिए।
दरिया – हरिया भाई और वन्दना जी क्या हम अपने कार्यक्रम की शुरुआत करें?
हरिया और वन्दना जी – अवश्य कीजिए हम इसी के लिए हाजिर हैं।
दरिया – वन्दना जी वैसे तो आप बहुत मशहूर लेखिका समाज सेविका तथा पशु-पक्षी और प्रकृति प्रेमी के रूप में विख्यात हैं, इसके अलावा आप किस विषय में रूचि रखती हैं ?
वन्दना जी – दरिया भाई मेरी रूचि भजन सुनना ,ग्रन्थ, साहित्य पढ़ना; पेंटिंग करना, लेखन, त्योहारों या रीति-रिवाज़ को विधि-विधान से करना, और योगाभ्यास, फोटोग्राफी के अलावा कुकिंग में है।
हरिया – वन्दना जी आज आप लिखनतु पर मौजूद लेखकों और पाठकों के लिए कौन सी रेसिपी बना कर लाई हैं?
वन्दना जी – दरिया भाई आज मैं डुबकी चावल की रेसिपी बना कर लाई हूं जो हमारे देश के ग्रामीण आंचल में बहुत चाव से बना कर खाया जाता है?
दरिया – ये खाली रेसिपी है या हकीकत में बना कर लाई हो?
वन्दना जी – दरिया भाई मैं आप सब के लिए एक टिफिन में बना कर लाई हूं और आपके साथ-साथ समस्त पाठकों एवं लेखकों को भी इसका जायका पसन्द आएगा। लीजिए खुद ही टेस्ट कर लें।
(टिफिन में से चम्मच से निकाल कर टेस्ट करते हुए)
दरिया – अरे, वाह इसका जायका बहुत ही स्वादिष्ट और उम्दा है।
हरिया – दरिया भाई थोङा सा डूबकी चावल सुप्रिया जी, रीना प्रजापत और मनोज सोनवानी जी को भी दे दो, उन्हें यह बहुत भाता है।
दरिया – ठीक है हरिया भाई, लो सुप्रिया जी आप भी टेस्ट कर लो और हां थोङा रीना प्रजापत और मनोज सोनवानी जी को भी टेस्ट करवा देना।
दरिया – इतनी शानदार रेसिपी बना कर लाने और खिलाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद वन्दना जी, उम्मीद है हमारे पाठकों और लेखकों को बहुत पसन्द आई होगी।
दरिया – वन्दना जी आप समाज के प्रति आपका नजरिया क्या है?
वन्दना जी – दरिया भाई हमें अपने समाज के प्रति स्वच्छ और सकारात्मक नजरिया अपनाना चाहिए ताकि हम एक दूसरे का सम्मान कर सकें और सबके साथ मिलकर स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें। हमें परस्पर सहयोग करना चाहिए पशु पक्षियों के प्रति दयाभाव रखना चाहिए।
दरिया - वन्दना जी आज की भाग दौङ की जिन्दगी में आर्थिक व भौतिकवाद के प्रति आप क्या सोचती हैं?
वन्दना जी - दरिया भाई आज की इस भाग दौङ की जिन्दगी में मनुष्य केवल भौतिकवाद को अपनाकर आगे बढ़ने पर जोर दे रहा है, जबकि यह मनुष्य को विकास के साथ विनाश की और अग्रसर कर रहा है। आज विश्व में युद्ध की स्थिति बनी हुई है, यह इसी का परिणाम है। वास्तव में मनुष्य को वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को अपना कर एक परिवार की तरह रहने पर जोर देना चाहिए। जब तक समाज और मन में शांति नहीं होगी तब तक समाज विनाश की और ही अग्रसर होता रहेगा। अतः हमें आध्यात्मवाद को भी उचित स्थान एवं महत्व देना चाहिए तभी विश्व समाज में शांति बनी रहेगी।
दरिया – वन्दना जी आप समाज सेवा करने के लिए किन संस्थाओं से जुङी हुई हैं?
वन्दना जी – दरिया भाई मैं वृद्धाश्रम और हरिद्वार गोशाला जैसी संस्थाओं के लिए समाज सेवा कार्य करती हूं।
दरिया – वन्दना जी आप हमारे पाठकों और लेखकों को जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने का संदेश देना चाहेंगी?
वन्दना जी – दरिया भाई मैं अपने सभी पाठकों और लेखकों से कहना चाहूंगी कि वे स्वंय को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन योगाभ्यास और व्यायाम करें, सभी के साथ मिलकर रहें और दुखों को भी वैसे ही स्वीकार करें जैसे सुखों को स्वीकार करते हैं और ईश्वर में विश्वास रखें।
दरिया – वन्दना जी आपने इस कार्यक्रम में आकर हमें प्रोत्साहित किया और एक बहुत सुन्दर रेसिपी से अवगत कराया इसके लिए आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद, हमें विश्वास है कि हमारे पाठकों और लेखकों को यह कार्यक्रम अवश्य पसन्द आया होगा।
वन्दना जी – आप दोनों का भी बहुत-बहुत धन्यवाद।
हरिया – दरिया भाई आज आप अपने पाठकों को क्या सुनाने जा रहे हो?
दरिया – हरिया भाई आज तो बस एक मुक्तक सुनाने का मन कर रहा है, लीजिए पेश है –
आपकी ये बात इतनी, कूल न होती
आपकी ये सलाह हमें कुबूल न होती
हम भी करते, चहल कदमी शहर में
गर शहर की सङकों पे, धूल न होती
हरिया – वाह, क्या बात है दरिया भाई। आज का यह एपिसोड यहीं पर समाप्त होता है, दरिया भाई, सभी पाठकों व लेखकों के साथ-साथ वन्दना जी का बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं स्वागत।
( सभी प्रस्थान करते हैं)
.. शेष अगले भाग में
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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