किताबों से मन भर गया जब से तुम्हें पढ़ा।
मोहब्बत ज़ालिम हो गई किसने तुमको गढ़ा।।
कुछ तो तरस खाओ वक्त न ऐसे गमाओ तुम।
काम होते रहेंगे उतारो भूत जो मुझपर चढ़ा।।
चेहरे पहले भी नजर आए मगर तुम सा नही।
तुम्हारे व्यवहार ने मौसम बदला असर बढ़ा।।
साथियों के साथ वक्त कट रहा था पहले भी।
मंत्र फूंका सा लगा या कुछ और तुमने पढ़ा।।
विनती कर रहा 'उपदेश' नवाब पसन्द नही।
मुँह न फेरना अब मुझसे तुम्हीं ने मुझे गाlढ़ा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







