फ़क़त ज़िंदगी है तब तक अपनी कहानी होगी, अजल के बाद तुर्बत की निगेहबानी होगी।
किस तफ़क्कुर को लेकर निकलेगी आख़िरी सांसें मेरी, ये सोच भी मेरी रूह पर इक हैरानी होगी।
कभी हँसी, कभी ग़म में गुज़र गई ये उम्र सारी, हर लम्हे की अपने दिल में एक निशानी होगी।
अपने ख्यालों के किसी कोने पर हमसे इक राब्ता रखना, उम्रभर आपकी हमपर बड़ी मेहरबानी होगी..!
🙏🥰मेरे जन्मदिन पर आप सभी का आशिर्वाद मुझे मिला इसके लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया 🤗🙏
@कमलकांत घिरी.


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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