मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम।।
जो अपने गुरू की नित सेवा करता है,
भाइयों संग निरंतर अभ्यास करता है।
आश्रम नियमों का सदा पालन करता है,
वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहलाता हैं।।
चुनौतियों का सामना करना पड़ता है,
असत्य के समक्ष खड़ा होना पड़ता है।
अपने मन को पहले जीतना पड़ता है,
तब वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम बनता है।।
अपने पिता की आज्ञा का पालन करता है,
माता कैकेयी का सदैव सम्मान करता है।
वचन पालन करने को वन वन भटकता है,
वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम बनता है।।
जो उनके अंहकार का मद मर्दन करते,
पंडित लंकेश को ज्ञान का सार बताते।
जनकपुरी में परशुराम को धैर्य सिखलाते,
फिर वो करूणा के सागर कहलाते।।
जिनको लक्ष्मण जैसा भाई मिले,
माता सिया जैसी मिले हमराही।
हनुमंत जैसा उनको सेवक मिले,
तभी वो फिर कहलाये रघुरायी।।
राजपाट की जिसको चाह नही है,
जीवन में केवल एक ही युद्घ करते।
नित हमको शांति का पैगाम हैं देते,
वो दाता होकर भी जनसेवक कहलाते।।
स्वरचित,मौलिक,अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।
Bhatimunnaram921@gmail.com


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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