दिल में क्या था, क्या छुपाकर मैंने रखा था,,
तुमको जान से ज्यादा..........!!
तुमको जान से ज्यादा,
मैंने प्यार दे दिया,
मैंने प्यार दे दिया,
मैंने प्यार दे दिया।
आँखों से लूटा नशा तुमने,
बांहों से मेरी बांहों, से मुझे अलग कर दिया,,
उठाकर चुमा सिर, नसीबी में फरेब कर दिया,
हाथों में चराग लिए खुद आगे गए हों,
मुझे पीछे अंधेरा ढूंढकर,
तुम्हें साथ ले गया,
तुम रोशन ए उर उस अंधेरे में उजाले से समा गए,
तुम्हें ढूंढूं तो कहाँ मिलोगे,
वहीं अंधेरा अब अंधेरा ही देता है,
तन्हाई का टूटा गिलास,
तुमसे छूटा तो झूठी साँसे लेता हूं,
जान क्यों तुम्हारे लिए जान मुफीज रखी है,
अपनी आबरू को ठुकरा के बैठा हूं,
तुम्हें तो जान से ज्यादा चाहता हूं,
इतना तो एहसान करो,
अपनी जान को थोड़ा सा भूल जाओ,
थोड़ी देर बचने को मेरी जान ले लो तुम,
इस जहां में जितनी जगह मैं घेर रखा हूं,
वो जगह भी तुम्हारी है अब वो ले लो तुम,
मैं हूं तो बस थोड़ी देर का,
वो भूली हुई जान ही मैं हूं,
इस जहां में छुपा कर रखा प्यार ही मैं हूं, दिल में क्या था, क्या छुपाकर मैंने रखा था,,
तुमको जान से ज्यादा,
जान...... से ज्यादा मैंने क्या ही दे दिया,
मैंने प्यार दे दिया,
मैंने प्यार दे दिया,
मैंने प्यार दे दिया।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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