छुट्टी के दिन (नज़्म)
सुना है छुट्टी के दिन अब आने वाले हैं
नई उमंगें साथ में वो लाने वाले हैं
कल से देख रहा हूं नुक्कड़ पर
लगातार कुछ बसें आती हैं
साथ में अपने कितने चेहरे लाती हैं
उनमें कितने भाई, बहन, शौहर आते हैं
रिश्तों के कैसे-कैसे गौहर आते हैं
(गौहर: मोती)
ये सूना सा गांव कल से चहक रहा है
रिश्तों की खुशबू में कल से महक रहा है
कई गुज़िश्ता माह अकेलेपन में बीते
रिश्तों के खाली से सूनेपन में बीते
(गुज़िश्ता: पिछला)
अब देखो ये चेहरे कैसे चमक रहे हैं
कल से देखो कैसे ये सब चहक रहे हैं
मेरे दिल में भी एक आस ने घर किया है
इन चेहरों को देख कर ये दिल बोल रहा है
माना कि मशगूल हो तुम अपने धंधे में
गर्दन अपनी फँसा रखे हो इस फंदे में
फिर भी ये दिल कल से यही अब सोच रहा है
शायद इस छुट्टी में तुम भी घर आ जाओ।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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