मैंने देखा है उन्हें
मैंने देखा है उनको, सड़क पर रोते हुए
आंखों, में अश्कों की, माला पिरोते हुए
जिन्दगी, में जब कुछ, हासिल न हुआ
मैंने देखा है उनको सुबक कर रोते हुए
वो नजर आते हैं रोज सभी चौराहों पर
इस पापी पेट के लिए वहीं पे सोते हुए
अभी तो उम्र है उनकी पढ़ने-खेलने की
मैंने देखा है जिंदगी का, बोझ ढोते हुए
ये दास्तां है मजबूरियों और नसीब की
उन को देखा है मैंने, बचपन खोते हुए
बीत, रहा है बचपन, सड़क चौराहों पर
यूं जिन्दा रहने की, कोशिश करते हुए
गुजर जाता है ये दिन भीख मांग कर
या ढाबे और दुकान पे काम करते हुए
मां-बाप, की गलती के, शिकार हैं कई
मैंने देखा है उन्हें हालात से लड़ते हुए
जुर्म और शोषण के शिकार हुए हैं कई
यूं अपने परायों के धोखे में फंसते हुए
ऐसे जीना भी यादव क्या जीना है कोई
मैंने, देखा नहीं कोई, हल निकलते हुए
क्या इस जिंदगी का, मोल नहीं यादव
क्यूं जी रहे हैं ये बच्चे, रोज मरते हुए
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







