हृदय की गहराईयों में उफान उठने लगता।
फिर धीरे-धीरे आँखों से सैलाब बहने लगता।।
आँसुओं की बूँदों का जैसे ठिकाना लुट गया।
य़े जानकर शापित दिल कम्पित होने लगता।।
कभी किसी के हाथ आँसू पोंछने को नही उठे।
सच्चाई महसूस कर तन बदन काँपने लगता।।
खुद के हाथ ही उठ जाते सिसकियाँ दबाने को।
आत्मा जकड़न महसूस करती मन मरने लगता।।
आत्मा चुपचाप बर्दाश्त करती रहती 'उपदेश'।
छिपा लेती दर्द को तभी चेहरा बदलने लगता।।
शक्तिशाली मृत्यु भी इस दर पर ठहरती नही।
एक दिन शांत हो जायेंगी लहरे सोचने लगता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







