मैने छोटे बच्चों को सड़को पर देखा है ।
अपने बचपन को परिस्थितियों से खींचते,
मैने उनको खुद के लिए लड़ते देखा है ।
बरसातों में पेड़ो की छांव पर,
चढ़ते सूरज के ताव पर,
मैने उनको कमाते देखा है।
हजारों लोग गुजरते है जिस सड़क पर,
मैंने उस सड़क पर उन्हें बचपन बिताते देखा है।
कद और मासूमियत के चोले के पीछे,
अपने कल की चिंता के आगे,
मैने उनकी मासूमियत का व्यापार होते देखा है।
मैंने उन्हें देखा कभी शीशे के पीछे,
कभी गाड़ी के आगे,
कभी लोगों के पीछे,
कभी छोटे बच्चों के आगे,
मैंने उन्हें देखा लोगो के तानें सुनते,
फिर भी मैंने उन्हें हंसकर आगे बढ़ते देखा है
मैने छोटे बच्चों को सड़को पर देखा है.......
And continue
--#Seth Kundan


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







