अहसास-ऐ-जुर्म में मेरी रूह को गिरफ्तार न कर
पाकिज़ा हैँ दामन मेरा, उसको तू दाग़दार न कर
मैं तेरे कदमों की मिट्टी क़ो सिर माथे पऱ रखती हूँ
मेरी इस इबादत का मान रख,उसे तार-तार न कर
इश्क़ में अफ़सोस नहीं होता ये बस इश्क़ होता हैं
बस इश्क़ कर,उस पे अपना हक़ इख्तियार न कर
मैंने अपनी रूह का मालिक तुझें तस्लीम कर लिया
तेरे कदमों में सिर ऱखा हैं अब शिकवे हज़ार न कर
मेरी शिद्द्त मेरी इबादत कोई नाम या इनाम न चाहे
बस एक नज़र देख ले,भले मुझकों हिस्सेदार न कर
मेरा इश्क़ जो तुझसें हैं मेरी रूह का ज़ेवर हैं जानाँ
मैंने पहना हैं इसको साँसों में,हवस सें दीदार न कर
ये इश्क़ हैं कृष्णा दिमाग़दार के बस का काम नहीं
तू अपना काम कर इसके पीछे वक़्त बेकार न कर
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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