विषय महावीर अमृत वाणी
दिनांक 30/03/2026
अपने आप से लड़ना दूजे से नहीं लड़ना है।
महावीर स्वामी का बस इतना ही कहना है।
अपने मन के विकारों को चिंतन से धोना है।
सफल जीवन उनका सत्य मार्ग पर चलना है।
अमृत वाणी बोलो कर्तव्य पथ पर चलना है।
जीवों और जीने दो महावीर जी का कहना है।
अहिंसा अध्यात्म चिंतन से आगे हमें बढ़ना है।
इंद्रियों को वश में कर ज्ञान प्राप्त भी करना है।
परोपकार करना अधिक संग्रह नहीं करना है।
महावीर स्वामी का बस इतना ही तो कहना है।
24 वे अन्तिम तीर्थंकर के वचनों में बांधना है।
मर्यादा से जीना चोरी कभी नहीं हमें करना है।
सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य को हमको अपनाना है।
अपरिग्रह अस्तेय पर आगे भी हमें चलना है।
पांच बाते महावीर स्वामी की जीवन में रखना है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞💞💞✒️💞💞💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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