मानवीयता ,
नैसर्गिक चक्षु से ,
परिक्षित होने वाली,
ऐसी अनुभूति है,
जिसको परिभाषित,
देवलोक भी न कर सके,
सिवाए ,
नैसर्गिक चक्षु से ,
देखने वाले ,
मानव दानव ,ऋषि मुनि,
जिनके अंतर्मन में है ,
मानवीयता !
----राजेश कुमार कौशल

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
मानवीयता ,
नैसर्गिक चक्षु से ,
परिक्षित होने वाली,
ऐसी अनुभूति है,
जिसको परिभाषित,
देवलोक भी न कर सके,
सिवाए ,
नैसर्गिक चक्षु से ,
देखने वाले ,
मानव दानव ,ऋषि मुनि,
जिनके अंतर्मन में है ,
मानवीयता !
----राजेश कुमार कौशल
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