जिस तरह से आपने मुझसे पूछा आज - क्या तुम मुझे याद करती थी..?
मैं बताना चाहूंगी -
सुबह उठते ही जो ख्याल आता था वो आपका था,
खाते-पीते, सोते-जागते, शाम ढलते याद आपकी आती थी,
दिल मन ही मन रोता था पर,
लेकिन आंखों में आंसू नज़र ना आती थी,
दिनभर को जैसे तैसे निकला तो रात की बारी आई,
हँस लिए मुस्कुरा लिए,
अब हमसे भी थोड़ी गुफ्तगू कर लो,
रात के इस सन्नाटे में,
मुझको सिर्फ तेरी बात और तेरी वो हँसी याद आ रही थी,
वो जो आपने मुझे उपनाम जो दिया है,
वो बड़ा रुला रही थी,
जिंदगी की इस भाग दौड़ में,
रात में आंख बंद होते ही,
एक तस्वीर छप रही थी,
जिसे देख रोने की सीमा समाप्त नहीं हो पा रही थी,
प्यार यूँ ही नहीं होता जनाब,
कुछ चीजों के कर्ज़े यादों से,
रातों में रोकर चुकाए जाते हैं,
जो वक्त हमने साथ बिताए थे,
उस वक्त के किस्से याद आते हैं,
जिन आंखों को मैं इतने प्यार से निहारती थी,
वो आँखें दिल और दिमाग से जाती नहीं है,
मेरे इस छोटे से हाथ में जो,
इतना बड़ा सा हाथ रहता था,
उसकी खुशबू अब रातों को महकती है,
जो सवाल आपने पूछा है,
उसका जवाब किस तरह बताऊं मैं,
जब मिलेंगे हम तो पढ़ लेना मेरी आंखों को,
पढ़ना तो ज़रा संभलकर पढ़ना,
कहीं खो न जाना अपने सवालों के जवाब में,
और जब जवाब मिल जाए तो,
गले लग जाना इतने कड़क,
की मैं छुड़ाना भी चाहूं तो छूट न पाए,
बस इसी तरह मेरी दिन और रातें गुजरती थी
और यादें सिर्फ आपकी आ रही थी,
जो मुझे रातों को बेचैन किए जा रही थी...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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