तुम्हारी मौजूदगी महसूस करना पड़ा मुझे।
ठंडे पड़े माहौल में अँधेरे से लड़ना पड़ा मुझे।।
दरवाजे पर दस्तक हवाओ की खुराफात रही।
अपना ख्याल खुद-ब-खुद बदलना पड़ा मुझे।।
किस तरह रात गुजारी बतलाए कैसे या खुदा।
दरवाजे की झिर्रियों को बन्द करना पड़ा मुझे।।
भोर कब हुई किसको पता शोरगुल ने जगाया।
उठना मुश्किल लगा करवटें बदलना पड़ा मुझे।।
इतनी बेरुखी किसलिए 'उपदेश' क़ुसूर किसका।
ना चाहते हुए बदकिस्मती से लड़ना पड़ा मुझे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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