इंतज़ार करते रहते थे
उस पल का,
जब हम मिलेंगे,
साथ बैठेंगे,
कुछ उससे सुनेंगे,
कुछ अपनी सुनाएँगे।
पर ये वक्त
इतना छलिया निकला
जब हम मिले,
ना वो बातें याद रहीं
जो दिल में सम्भाल रखी थीं,
ना कोई बात बाकी थी।
आँखों में दूरियों की नमी थी,
होठों पर एक चुप्पी थी,
जो दोनों के दरमियान
बहुत कुछ कह रही थी ।
ना उसने कुछ कहा,
ना मैंने कुछ कहा,
खामोशी, खामोशी से
बात कर
वापस आ गई ।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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