व्रजगोपालस्य निजांशलाभे,
संसारचक्रं त्यजतो भवाम्भोः।
प्रेमरसपूर्णं स्फुरद्विभासं,
गोपीकानाथं भजतां सुखं॥
साक्षात् ब्रजाधिपं नवं नवं,
गोपालरूपं सदा विभाति।
भक्तानुग्रहार्थं कलाय नित्यं,
कृष्णं वन्दे जननीशसूतम्॥
-अशोक कुमार पचौरी
(जिला एवं शहर अलीगढ से)
अपनी रचनायें लिखन्तु डॉट कॉम (https://likhantu.com) पर प्रकाशित करने के लिए शीर्षक के साथ हमें हमारी ईमेल आईडी likhantuofficial@gmail.com पर भेजे
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







