जिसे तुम समझ बैठे अपना सब कुछ..
उसके सपनों में कोई और है..
जिसे समझ चुके थे तुम किनारा ..
उसका छोर कोई और है..
समझ रहें हो बेपरवाह होकर जिसे अपना समय..
वो किसी और का दौर है..
इन शहनाइयों की धुन में क्यों खो रहे हो..
ये उसकी शादी का शोर है..
✍🏻 अनुकूल शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







