माँ और पिता
घर ईंटों से नहीं बनता,
घर तो रिश्तों की गर्माहट से बसता है।
और उस गर्माहट का पहला नाम है — माँ,
दूसरा नाम है — पिता।
माँ रोटी पर घी नहीं,
अपने सपने लगाती है।
पिता जेब में नोट नहीं,
पूरी ज़िंदगी कमाकर लाते हैं।
माँ की दुआ चलना सिखाती है,
पिता का विश्वास गिरकर भी उठना सिखाता है।
माँ आँखों का उजाला है,
पिता जीवन का हौसला है।
जिस दिन माँ की थाली खाली रह जाए,
समझ लेना बेटे का फ़र्ज़ अधूरा है।
जिस दिन पिता की आँखें नम हो जाएँ,
समझ लेना घर का आसमान रो पड़ा है।
अगर दुनिया में सबसे बड़ा कोई तीर्थ है,
तो वह माँ-पिता के चरण हैं।
जो उनके सम्मान को अपना धर्म बना ले,
उसका हर दिन एक नया पर्व है।
झुककर उनका आशीर्वाद ले लिया करो,
यही सबसे बड़ी दौलत है।
बाकी सब कुछ समय के साथ बदल जाता है,
माँ-पिता का प्रेम ही जीवन की सबसे सच्ची इबादत है।
— बाल कवि: Himanshu Dutt 795
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