लगता है जैसे अपनी कुछ सांसे रूठ गई हैं
हाथों से जबसे अपने जो किताबें छूट गई हैं
दिन भर आँखे तकती हैं तस्वीरें कितनी ही
पढ़ने लिखने की विरासत सारी छूट गई हैं ||

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
लगता है जैसे अपनी कुछ सांसे रूठ गई हैं
हाथों से जबसे अपने जो किताबें छूट गई हैं
दिन भर आँखे तकती हैं तस्वीरें कितनी ही
पढ़ने लिखने की विरासत सारी छूट गई हैं ||
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