काश ये दिल तुमपे आया न होता
तुम्हारे लिए गुनगुनाया न होता
वीरानियांँ न होती ज़िंदगानी में
आंँखों में समंदर समाया न होता
बेकली में रात-दिन इतंजा़र न होता
बिछड़ने का अंदेशा लगा न होता
बिमाड़ों सा हाल हुआ न होता
काश ये रोग लगा हीं न होता...

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
काश ये दिल तुमपे आया न होता
तुम्हारे लिए गुनगुनाया न होता
वीरानियांँ न होती ज़िंदगानी में
आंँखों में समंदर समाया न होता
बेकली में रात-दिन इतंजा़र न होता
बिछड़ने का अंदेशा लगा न होता
बिमाड़ों सा हाल हुआ न होता
काश ये रोग लगा हीं न होता...
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