सब्र की अब इंतहा हो गयी है,
हर ख़ुशी मेरी ग़मज़दा हो गयी है।
हर तरफ़ की हवा बेवफ़ा हो गयी है,
दीप उम्मीद के अब तो बुझने लगे हैं।
धागे साँसों के अब खुलने लगे हैं,
दर्दे दिल अश्क़ बनके बहने लगे हैं।
अलविदा दोस्तों, अलविदा दोस्तों,
लब हमारे ये सबसे कहने लगे हैं।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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