भंवर जैसे बवंडर आ गई
मंजर से मन तक आ गई ॥
रिश्तों के फूल मुरझा हो गई
फरिश्ता के दिल मारा हो गई ॥
बहर में मोती समझा मैं ने
लहर पर उठ गए मीन हो गई ॥
बंद कमरे की चिटकनि समझा मैं ने
खुले कमरे की समुद्र बन गई हो ॥

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
भंवर जैसे बवंडर आ गई
मंजर से मन तक आ गई ॥
रिश्तों के फूल मुरझा हो गई
फरिश्ता के दिल मारा हो गई ॥
बहर में मोती समझा मैं ने
लहर पर उठ गए मीन हो गई ॥
बंद कमरे की चिटकनि समझा मैं ने
खुले कमरे की समुद्र बन गई हो ॥
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