मुझे खुद पर काबू क्यों नहीं रहता,
हर पल दिल किसी डर में ही रहता।
मैं बुरी नहीं हूँ, बस डरी हुई हूँ,
खो देने के खौफ से भरी हुई हूँ।
हर रिश्ता लगता है फिसल जाएगा,
मेरी ही गलती से सब छूट जाएगा।
डर इतना हावी, कि प्यार भी बोझ लगे,
अपनापन रखते-रखते ज़ंजीर सा हो जाए।
जलन मेरी आदत नहीं, बस डर का असर है,
खो देने का खौफ हर पल मेरे अंदर है।
जो रहे पास, बिना शर्त और सवाल,
शायद वही सिखा दे—प्यार है विश्वास, न कि बवाल।
Gitanjali gavel


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







