ख़्वाब की झलक (नज़्म)
मैंने कल रात एक ख़्वाब नहीं
ख़्वाब की झलक देखी
कहीं पे घर है मेरा
और तुम हो साथ मेरे
बदले हुए से मौसम हैं
और बदले हुए जज़्बात मेरे
वो चांद कल तक जो तन्हा-तन्हा था
उसे जैसे किसी चांदनी का साथ मिला
एक काले, उदास से उस आसमाँ को
जैसे कल किसी रोशनी का साथ मिला
थोड़ी देर को ही सही, साँसे महक उठी मेरी
दिल की जो एक अंधेरी सी गली है,
वो गली यक-ब-यक कल चमक उठी मेरी
घर का हर कोना जैसे खिल सा उठा था कल
हर जगह पे फैली थी बस तेरी खुशबू
कल तक सबकुछ अंधेरे से घिरा रहता था
एक नूर सा फैला था वहां हरसू
तुम अपने हाथ में चाय का प्याला लेकर
आई थी मुझको मेरी नींद से जगाने को
जब वो मीठी सी आवाज़ पड़ी कानों में
जो दी थी तुमने मेरी जान मुझे जगाने को
सच कहूं तो एक नया एहसास जगा
किसी के साथ मुझे होने का एहसास जगा
कुछ पल को तो लगा जैसे सुबह बदल सी गई
मेरे जीने की जो थी वजह बदल सी गई
तुम्हारे चेहरे की खुशी का क्या बयान करूं
उस मदहोश सी हंसी का क्या बयान करूं
तेरे चेहरे का नूर आज भी मेरे चेहरे पर है
उस ख़्वाब का गुरूर आज भी मेरे चेहरे पर है
तुम्हारी हाथ की वो चाय में जो नशा था
वो किसी शराब के प्याले में नहीं मिल सकता
इससे पहले कि कुछ पल और तुम्हारे साथ बीते
मेरी नींद टूट गई, और वो ख़्वाब बिखर गया मेरा
लेकिन बस इसी एहसास से ये चेहरा निखर गया मेरा
अगर ये ख़्वाब सच हुआ, तो अपनी खुशी का हिसाब क्या होगा
अगर ये ख़्वाब का टुकड़ा है, तो सोचो कि ख़्वाब क्या होगा।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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