दो दिन मौसम हक में रहा फिर बदल गया।
मोहब्बत में माँ-बाप का ज्यादा दखल गया।।
सूरज का प्रभाव दिन में धीरे-धीरे बढ़ने लगा।
पसीना बह निकला जैसे जिस्म पिघल गया।।
सिर पर साया आज भी तरोताजा सा लगता।
छोटी-मोटी गलती से हर्षित मन कुचल गया।।
अपनी चली नही जिसके सामने यहाँ 'उपदेश'।
उसकी बात मानने से वसीयत से महल गया।।
साँझ पर सवार होकर अँधेरा दबे पाँव आया।
ख्वाब सजाये पड़े रहे विस्तर कोई मसल गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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