मोहब्बत की दीवारों में दफ़न-ए-राज़ कर दो
हुई थी कभी मुलाकते उसे अब खारिज कर दो !!
कौन जाने कितने नग्मे थे उसे अनसुने कर दो
अनदेखा कर नजरों को करार-ए-राहत दे दो !!
चाहत के झरोखेमें हिसाब का एक झोला दे दो
दगा-बाजी के खेलो को नाकामी-ए-हार दे दो !!
तड़प की सीमा को किनारे का सहारा दे दो
बेहोशीमें तब्दील कर नशा-ए-आदत दे दो !!
थकसे गए, सब्र भी रोएँ, अखियनमें अंधापा दे दो
दरगुजर करे, माफ़ी चाहे, उस पे दस्तख़त कर दो !!
मोहब्बत की दीवारोंमें दफ़न-ए-राज़ कर दो
हुई थी कभी मुलाकते उसे अब खारिज कर दो !!


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







