कविता : विनाश....
आदमी ने बहुत तरक्की कर
विकास का लोहा मना रहा
मगर खुद मरने के लिए
हथियार ही तो बना रहा
किस बातों का
विकास है ?
विकास से भी ज्यादा
विनाश है
अगर आदमी
चाहता
प्रमाणु अस्त्र शस्त्र
न बनाता
विश्व का हर गरीब आदमी
भर पेट खाता कोई न रोता
हर कोई यहां आराम से
रहता चैन की नींद सोता
हर कोई यहां आराम से
रहता चैन की नींद सोता.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







