छत्तीसगढ़ी व्यंग्य
रंग ल अपन बदले खातिर,अतका अगुवावत हें,
मनखे मन ल देख देख,टेटका घलु लजावत हें
लबरा - लबरी के चारों मुड़ा बोलबाला हे,
सिरतोन गोठियइया मन, मुंह ल लुकावत हें
नगदी खवइया मन के,गाल पिचके पिचके हे,
उधारी खवइया मन, मोटावत चिकनावत हें
जवान जवान लइका, मोबाइल मं फिदा हें,
देख देख दाई ददा के, तरुवा सुखावत हे
ए कइसन जमाना आगे,सांस लेना मुश्किल हे,
धरती के सुग्घर हवा मं,धूंगिया समावत हें।।
टेटका - गिरगिट
लबरा लबरी - झूठा झूठी
सिरतोन - सच्ची, सत्य
तरुवा सुखावत हे - मुंह सुखना, घबराना, चिंता
धूंगिया - काला धुआं
भाव सौंदर्य - वर्तमान में मानवीय मूल्यों और पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ते जा रहा है।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







