कविता : बदला....( २ )
क्या कहूं आज
की कली में
इस तुम्हारे
ही गली में
अपने घर वालों
को छोड़ कर
एक पतली चादर
को ओढ़ कर
सर्दी में कांपते रहे
ठंडी हवा चलती रही
पहले शाम फिर
रात भी ढलती रही
तुम्हारा इंतजार
करते रहे
तुम्हारे लिए हम
मरते रहे
मगर न तो
तुम आई
न खबर तुम ने
पहुंचाई
ये तुमने ऐसा
धोखा क्यों दिया ?
बदला तुमने किस
बात का लिया ?
बदला तुमने किस
बात का लिया.......?
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







