बिना प्रांगण के घर में रौनक न आएगी
सुबह की किलकती धूप कहा जायेगी
चहकती हुई चिड़िया घर तो आएगी
आएगी सही पर रुक न पाएगी
कवियों की कविता केसे पूरी हो पाएगी
बिना प्रांगण घर की परिभाषा अधूरी रह जायेगी...
साक्षी लोधी

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बिना प्रांगण के घर में रौनक न आएगी
सुबह की किलकती धूप कहा जायेगी
चहकती हुई चिड़िया घर तो आएगी
आएगी सही पर रुक न पाएगी
कवियों की कविता केसे पूरी हो पाएगी
बिना प्रांगण घर की परिभाषा अधूरी रह जायेगी...
साक्षी लोधी
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