माना कि तुम्हारा मन, समंदर है
तुम्हारी आंखें तो,कातिल भंवर है !
समेट ले, वो जाने कब,आगोश में
नागन से भी, वो जहरीली जहर है!
बड़े शूरवीर भी,बेदम हो जाते हैं
आंखें तुम्हारी, इतनी ताकतवर है !
कोई बचा नहीं,आज,तक कभी
इस पल फूल,उस पल खंजर है!
हम तो घायल,हर बार हो जातें हैं
तुम्हारी कनखियों का ही असर है !
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







