कितने वक्त हो गए गुजरे...!
कितने वक्त हो गये गुजरे, और दिल सितम गार हो बैठा है
खुद के ही मुखालिफ, अपना आज़ार कर बैठा है ।।
दिल - ए - हसरत की बंदिशों में आखिर रखा ही क्या है
जो माशूक के इंतजार में , ग़म ए एतबार कर बैठा है।।
जायज़ है उनका यूं रूठ जाना हमसे
मगर मेरा रुस्वा दिल भी उनके मनाने का अरमान लिए बैठा है।।
- तुलसी पटेल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







