काश (नज़्म)
काश एक ऐसा लफ्ज़ है
जिसके ज़ुबाँ पर आते ही
न जाने कितने ही रंग-बिरंगे
ख़्वाब ज़हन में आ जाते हैं
दिल के खाली आसमान पर
इन्द्रधनुष से छा जाते हैं
जिन ख्वाबों की कसक दिल में
दबी बड़ी है बरसों से
जिन ख्वाबों की महक दिल में
दबी पड़ी है बरसों से
जिनको देखने की अब शायद
दिल में बची नहीं हिम्मत
ज़हन भी शायद इनको लाने की
जुटा न पाया हो हिम्मत
ऐसे में एक काश दबे पाओं आकर
खोल देता है वो पिटारी
जिसमें सारे ख़्वाब दफ़्न हैं।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







