कविता: करवाचौथ
दिनांक : 28/10/2026
छलनी से जब झाँकता है चाँद का उजियारा,
रुपहले आसमान में चमकता सितारा प्यारा।
हाथों की मेंहदी में सत्यवीर का नाम सजा है,
इस पवित्र व्रत से हर बंधन नया हुआ है।
सोलह श्रृंगार करके बैठी है सजी सँवरी,
हर एक साँस में जैसे प्रीत की है डोरी।
निर्जल रहकर जो मन में विश्वास जगाया है,
उसी समर्पण ने दाम्पत्य को महकाया है।
प्यार की इस छाँव में उमंगों का मेला है,
सुहागिनों के संग आज चाँद ने घेरा है।
लंबी उम्र हो सत्यवीर की, दुआ यही दिल से है,
हर जनम का साथ अब तो इस मिलन से है।
दीपिका के जीवन में खुशियों की छाँव रहे,
सत्यवीर के संग हर पल एक नया भाव रहे।
करवा चौथ का यह पावन पर्व सुहाना हो,
हर दुआ में बस साजन का ही तराना हो।
सत्यवीर वैष्णव बाराँ राजस्थान 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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