नाम :- श्रेयसी [SHREYASHI]
शिक्षा :- M.A (शास्त्रीय संगीत)
कार्यभार :- Former Professor in Indian Classical Music (HOD)
आपके बारे में संक्षेप में :- श्रेयसी अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी की कवयित्री हैं और साथ ही वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की पूर्व प्राध्यापिका भी रह चुकी हैं। शब्दों की सुंदरता, उनकी ध्वनि और उनके भीतर छिपी भावनाएँ, उन्हें गहराई से आकर्षित करती हैं। वे शब्दों को अत्यंत संवेदनशीलता और कौशल के साथ पिरोती हैं और उनके माध्यम से उन भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं, जो कभी खुलकर कह दी जाती हैं और कभी मन के भीतर अनकही रह जाती हैं। उनकी रचनाओं में भावनाओं की गहराई, अनुभवों की सच्चाई और संवेदनाओं की कोमलता स्पष्ट रूप से झलकती है।
रूचि :- लेखन और पठन के अलावा, श्रेयसी को जीवन की छोटी-छोटी खुशियों से भी विशेष लगाव है। उन्हें खाना पकाने का शौक है और वे नए-नए व्यंजनों को आज़माना पसंद करती हैं। यात्रा करना उनके लिए न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह उन्हें नए अनुभवों, संस्कृतियों और भावनाओं से जोड़ता है, जो आगे चलकर उनकी रचनात्मकता को और समृद्ध बनाते हैं। इसके साथ ही, वे अपने परिवार के साथ समय बिताना अत्यंत महत्वपूर्ण मानती हैं और इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा समझती हैं। कुल मिलाकर, श्रेयसी का व्यक्तित्व कला, संवेदना, सृजनशीलता और पारिवारिक मूल्यों का एक सुंदर और संतुलित संगम है।
साहित्य यात्रा :- श्रेयसी की लेखनी को एक बड़ा पाठक वर्ग मिलता है। अमर उजाला काव्य मंच पर उनकी लगभग 400 कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जहाँ वे नियमित रूप से लेखन करती रही हैं और उनकी रचनाएँ पाठकों के बीच विशेष रूप से पसंद की जाती हैं। इसके अलावा, उनकी साहित्यिक प्रतिभा को पहचान देते हुए अमर उजाला काव्य पर उन्हें कई बार “शीर्ष कवि” अनुभाग में स्थान दिया जा चुका है, जो उनके निरंतर और प्रभावशाली सृजन का प्रमाण है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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